भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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ब्रह्मचारियों के लिये नियम

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चुके हैं, तो उस स्थित में आप यह कह सकते हैं कि आपने अपनी साधना में यथोचित उन्नति प्राप्त कर ली है। अब आप निश्चंक हैं। इस पर भी आपको अपनी साधना स्थगित (बंद) नहीं करनी चाहिये, यह जानते हुये कि आप एक जितेन्द्रिय योगी हैं। यदि आप अपना साधन-अभ्यास बंद कर देंगे तो आपका भारी अघोषित होगा। यदि आप जीवनमुक्त और शक्तिशाली योगी क्यों न हो, आपको चाहिए कि आप सांसारिक लोगों के साथ विचरण करते समय अत्यन्त सावधान रहें।

एक महात्मा जो अपने शिष्यों के द्वारा एक अन्तर माना जाता था, वह योग-ब्रह्म हो गया। वह भी स्त्रियों के साथ स्वतन्त्रता पूर्वक संसर्ग करते रहने के कारण, पतित हो गया। वह काम का शिकार बन गया। यह कैसा दुःख-मय दुर्भाग्य है। साधकगण अनेकानेक बड़ी बड़ी कठिनाइयों को पार करते हुए योगस्वी निश्चयिणी पर आरूढ़ होते हैं परन्तु वे अपनी असावधानी व आध्यात्मिक अहंकार के कारण इस प्रकार से पतित होते हैं कि फिर वे जीवन पर्यन्त भी ऊपर उठने में समर्थ नहीं होते।

वे साधक जो योग मार्ग में बहुत कुछ उन्नति कर चुके हैं, उन्हें, चाहिए कि वे बहुत सावधान रहें। वे स्वतन्त्रता पूर्वक स्त्रियों के साथ संसर्ग न करें। उनको मूर्खतावश यह नहीं समझना चाहिये कि वे योग में पूर्ण प्रवीण हो गये हैं। एक प्रसिद्ध संत महात्मा का अघोषित हो गया। वह स्वतन्त्रता पूर्वक स्त्रियों के साथ संसर्ग रखता और उन्हें अपनी चेलियाँ बनाई, जो उसके पैर तक दवाने लगीं। क्योंकि उसने अपने वीर्य को सर्वथा रूपांतरित कर श्रोत्र में परिणत नहीं किया था और चूंकि उसके मन