भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य साधना

पैर के टखने आपस में एक दूसरे से मिल जानें चाहिये। हाथों को घुटनों पर रख दीजिये। शरीर गर्दन और मस्तक को नीचा रखिये। पहले पहल आध घंटे तक बैठने का अभ्यास कीजिये और पुनः पुनः धीरे धीरे समय बढ़ाते हुये पूरे तीन घंटे तक बैठने का अभ्यास कीजिये। तीन घंटों तक लगातार एक आसन से बैठना ही आसन-जय कहलाता है।

(२) शीर्षासन

बल भि लकुल मीधे खड़े हो

यह सब आसनों का राजा है। इस आसन से होने वाले जो लाभ हैं, वे अकथनीय और अगणित हैं। यह मस्तिष्क व स्मरण-शक्ति को बढ़ाता है, ब्रह्मचर्य की रक्षा करता है तथा वीर्य को श्रोत्र में परिणत करता है।

समतल भूमि पर चौगुनी कंबल बिछा लीजिये। दोनों हाथों की अंगुलियों को तालीबंध कर लीजिये। अब अपने मस्तक के ऊपरी भाग को दोनों हाथों की बद्ध हथेलियों में रखिये। धीरे धीरे टांगों को ऊपर उठाते हुए शिर के जाड़ये। टांगों को थामने के