भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य साधना

(८) मैं अब पवित्रता का अनुभव कर रहा हूँ

ॐ ॐ ॐ

किसी कागज पर छुः बार लिखिये “ॐ पवित्रता !” इसको आपनी जेब में रखिये। दिन में कई बार पढ़िये। इसे आप अपने घर में किसी दीवाल पर चिपका सकते हैं अथवा इसे किसी प्रमुख स्थान पर रख सकते हैं जहाँ वह हर समय आपके देखने में आता रहे। “ॐ पवित्रता” इन शब्दों का मानसिक चित्र आपके सामने सदा घूमत रहे। ब्रह्मचारी संत महात्माओं तथा उनके शक्तिशाली कार्यों का सदा स्मरण करते रहिये। ब्रह्मचर्य रूपी पवित्र जीवन के लाभ तथा अपवित्र जीवन से उत्पन्न होने वाली हानियों तथा पापों पर विचार करते रहिये।

नित्य अनुभव करते रहिये “भगवान की कृपा से मैं हर तरह से दिन दिन श्रेष्ठतर होता जा रहा हूँ” इसे आत्म-संकेत कहते हैं। यह भी एक प्रभावशाली विधि है।

(१७) टंडा हिप वाथ (कटि स्नान)

टंडा हिप वाथ बल और तेज बढ़ाने वाला है। हिप-वाथ और बैठक-स्नान में विशेष अन्तर नहीं है। इस संवन्ध में विशेष जानकारी के लिये (Louis Kuhne) लुई कुन्हे की “जल चिकित्सा” शीर्षक पुस्तक देखें। टंडा हिप वाथ अन्नेन्द्रिय और मूल संकन्धी नाड़ियों को मृदु आश्राम प्रदान करता है तथा रात्रि में होने वाले स्वप्न दोष को रोकने में यह एक रामवाण औषधि (प्रयोग) है। यह नाड़ी-मंडल को पुष्ट करने वाली एक मही विधि है।

किसी नदी मील या तालाब में आध घंटे तक इस प्रकार खड़े रहिये कि पानी आपके नामी तक ही रहे उपर न जाय। खड़े खड़े गायत्री या अन्य किसी भी मंत्र का