ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य साधना
इस मन्त्र “ओ३म् सच्चिदानन्द आत्मा” का जप कीजिए। याद रखिये आत्मा-लिंग रहित है। इस मन्त्र के मानसिक जप के द्वारा आपको शक्ति मिलेगी।
अभ्यास के प्रारम्भ में आपको महिलाओं से तथा महिलाओं को पुरुषों से दूर रहना चाहिये। जब आप ब्रह्मचर्य में संस्थित होगये हैं तो सावधानी के साथ महिलाओं से मिलिये तथा अपने बल की जाँच कीजिये। यादें आपका मन अब भी बहुत शुद्ध है, यदि मन में आकर्षण तथा उत्तेजन नहीं है, यदि लैंगिक विचार नहीं हैं, यदि उपरति, शम तथा दम के द्वारा मन काम नहीं करता तो आपने वास्तव में ही आध्यात्मिक बल का अर्जन कर लिया है, आपकी साधना में काफी उन्नति हुई है। अब आपको कोई भी डर नहीं है। अपने को जितेन्द्रिय योगी समझकर अपनी साधना को बन्द मत कर दीजिये। यदि आप साधना को बन्द कर देते हैं तो आपका पतन होगा। आप माह्व योगी तथा जीवनमुक्त ही क्यों न हों, सांसारिक लोगों से मिलते समय बहुत सावधान रहिये।
आत्म साक्षात्कार के मार्ग पर चलने वाले साधकों को, जो गृहस्थाश्रम में हैं, तथा जिनकी आयु ५० वर्ष की है, उन्हें चाहिये कि वे ६ महीने के लिये एक बार अपने पति या पत्नी से सारा सम्पर्क दूर रखें। उनको पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिये। तभी वे इस जन्म में आत्म साक्षात्कार को प्राप्त कर सकते हैं। आध्यात्मिक मार्ग में अधूरी साधना को स्थान नहीं है।
ब्रह्मचारियों को पथ-प्रदर्शन आप महीनों तथा वर्षों तक लैंगिक न्यमन्यों को रोक