भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्य माला

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नमस्कार करता हूँ। परंतु फिर भी मैं अत्यन्त कामुक हूँ। अब मैं क्या करूँ ?” स्पष्ट है कि उसके मन में वैराग्य तथा विवेक नाम मात्र को भी नहीं है। पुराने संस्कार तथा वासना अत्यन्त बलशाली हैं।

अस्त्रियंजर तथा मुर्दा शरीर की स्मृति से आपकी वैराग्य आवेगा। इस शरीर की उत्पत्ति मल से ही हुई है। यह मल से पूर्ण है तथा अन्त में यह भस्मीभूत हो जाता है। यदि आप यह याद रखें तो आपके मन में वैराग्य का प्रादुर्भाव होगा। संसार के दुखों का स्मरण कीजिये। विषयों की असत्यता तथा वन्धनों पर विचार कीजिये। किसी भी तरीके का अभ्यास कीजिये। पुराने संस्कार तथा वासना कितने ही बलशाली क्यों न हों नियमित ध्यान, तप, प्रार्थना, मासिक आहार, सत्संग, शीर्षासन, मर्यादामन, स्वाध्याय, “मैं कौन हूँ ?” का विचार तथा किसी पवित्र नदी के तट पर तीन महीनों तक एकान्तवास के अभ्यास के द्वारा वे विनष्ट हो जायेंगे। अनात्मक की विजय अणुआत्मक के ऊपर होती है। आपको कभी भी हिंमत न दारनी चाहिये। ध्यान में निमग्न हो जाइये, मार को नष्ट कीजिये। संग्राम में विजयी बनिये। तेजस्वी योगी बनिये। आप शुद्ध आत्माहैं।

हे विश्व राजन्। इसका अनुभव कीजिये।