भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य माला

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६. हे श्याम ! आप नैष्ठिक ब्रह्मचारी हैं । आपने मन, वचन तथा कर्म से आजीवन ब्रह्मचर्य पालन का व्रत लिया है । सूर्य भी आपके सामने कम्पित होगा । ब्रह्मचर्य शक्ति के द्वारा आप सूर्य का भेदन करेंगे । आप महान् हैं ।

१०. सक्रियों प्रदीप को फूल समझ कर उसी में श्रपनी जान को खो बैठती हैं । उसी प्रकार कामुक नर नारी शारीरिक सुन्दरता के द्वारा आकृष्ट होकर काममि में ही जल मरते हैं ।

११. ध्वनि के द्वारा हिरण्य, स्पर्श के द्वारा हाथी, रूप के द्वारा पत्तिंगे, स्वाद के द्वारा मछली, गंध के कारण मक्खी फन्दे में आ पड़ती हैं । जब एक ही इन्द्रिय में इतनी शक्ति है तो मम्मिलित पांचों इन्द्रियों में कितनी शक्ति होगी ।