ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
पृष्ठ 193, कुल 237 में से
संदर्भ में पढ़ेंनींबू या नारंगी के रस को पानी में मिलाकर पीजिये। एक सप्ताह तक फल का आहार कीजिये। दूसरे सप्ताह में फल व दूध का तब तीसरे सप्ताह में दिन में अपना साधारण भोजन कीजिये। और रात्रि में फल तथा दूध का। जब तक कि आप अपने भोजन के पुराने तरीके पर न आ जायें एनिमा का प्रयोग करते रहिये।
ब्रह्मचर्य सुधा बड़ा लाभदायक आयुर्वेदिक शौपथि है।
कम सोह्ये। बाईं करवट सोह्ये। पीठके बल या पैट के बल न सोह्ये। चार बजे प्रातः उठिये। आध्यात्मिक माधना में लग जाह्ये। उन सभी वस्तुओं का पूर्णतः परित्याग कीजिये जिनसे कामोत्तेजन हो।
रोग का पूर्ण निवारण १ से ६ महीने तक में हो सकता है। यदि रोग पुराना है तो निवारण भी अधिक समय में होगा। प्रकृति के कार्य धीमे हैं, परन्तु हैं पक्के। कामुक विचारों से आक्रान्त होने पर आपको उनके बदले दिव्य विचारों को प्रभव देना होगा।
निम्नांकित नियम उन सभी लोगों के लिये लागू हैं जो स्वप्नदोष या किसी भी बुरी आदत के शिकार बने हुये हैं।
१. सामान्य
१. कुमंगति, गपशप, ड्रामा, सिनेमा, उपन्यास का परित्याग कीजिये। विपरीत लिंग वाले से अधिक न मिलिये। यदि यह अनिवार्य हो तो दिव्य भाव रखिये।
२. अपनी आवश्यकताओं को अधिकारिक क्रम रखिये। वारंवार दर्पण में चेहरा न देखिये। अनुशामित तथा धमपुत्र जीवन बिताह्ये।