ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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६. धूम्रपान मादक द्रव्य तथा आमिषाहार का परित्याग कीजिये।
१०. चाय, काफी, खटाई, अधिक मिठाई तथा चीनी का त्याग कीजिये। कभी कभी (सप्ताह में एक बार) उपवास कीजिये। उस दिन जल भी न पीजिये। बिना अदरख डाले दूध भी न पीजिये। सुस्वादु भोजन, चरती आदि का परित्याग कीजिये।
आवश्यक
यह दुर्बलता दूर होजायगी। इसके लिये उद्दिष्ट या चिन्ताग्रस्त न बनिज्ये। चिन्ता के द्वारा आप और अधिक दुर्बल बन जायेंगे। भूत से शिष्टा लीजिये। तथा लाभ उठाइये। भविष्य की चिन्ता न कीजिये। अपने हृदिकोण को बदल डालिये। विचार का अभ्यास कीजिये। ब्रह्मचर्य के लाभ पर ध्यान कीजिये। हनुमान, भीष्म, तथा अन्य अश्वमेध ब्रह्मचारियों के जीवन पर ध्यान दीजिये। विषय-परायण जीवन से होने वाली हानियाँ—स्वास्थ्य की हानि, लज्जा, रोग तथा मृत्यु पर विचार कीजिए। आप विश्व-पिता की सन्तान हैं। सारा सुख आपके अन्दर ही है। नियम वस्तु में लेथ मात्र भी सुख नहीं है। अपने को शरीर से पृथक् कीजिए। ईश्वर से तादात्म्य सम्बन्ध स्थापित कीजिए। यदि आपका मन शुद्ध तथा स्वस्थ है तो आपका शरीर भी शुद्ध तथा स्वस्थ रहेगा। अतः भूत को भूल जाएं। नवीन, श्रेयस्कर धर्म तथा अध्यात्म के जीवन का अवलंबन कीजिए। दिव्य जीवन का आस्वादन करना गौरविए। अधिक साधना कीजिए। आप पूर्णतः परिवर्तित तथा दिव्य बन जायेंगे।