ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य साधना
स्वतंत्र के समय
भूत की आदतों के फलस्वरूप यदि आप किसी स्वतंत्र में हो तो निम्नांकित उपदेशों का पालन कीजिए।
१. आपके में न रहिए। दूसरों की संगति में रहिए।
२. जप तथा कीर्तन।
३. जोरों से कई बार ओम् का जप कीजिए।
४. कुछ दूर तक जोरों से दौड़िए। शीर्षासन कीजिए।
५. विचार कीजिए “यह कामना किसमें उठती है ?” मन तथा शरीर से अपने को प्रथम कीजिए।
६. अपनी देवी प्रकृति का निश्चय कीजिए। आप आत्मा हैं। मन आपका नीकर है। मन के कार्यों का शास्त्री बनिऐ। कामनाओं को प्रारम्भ में ही कुचल डालिए। उनके प्रति झुकिए नहीं।
७. ईश्वर से प्रार्थना कीजिए। प्रेरणात्मक स्तोत्रों का पाठ कीजिए।
८. अपने भीतर ईश्वरों की स्थिति का भान कीजिए।
९. किसी प्रेरणात्मक आध्यात्मिक ग्रन्थ के अध्ययन में लग जाइए।
१०. इससे आपको बल मिलेगा तथा आप पतन से बच जायेंगे।
ऊर्द्धवरेता योगी
मन, प्राण तथा वीर्य एक ही हैं। मन तथा प्राण में दूध तथा जल जैसा संबंध है। यदि मन को नियन्त्रित कर लिया गया तो प्राण तथा वीर्य स्वयं निरुद्ध हो जाते हैं।