भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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फैशन-भयंकर अभिशाप

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बाँसी हमें इन्द्रियों तथा मन को वशीभूत करने के लिए शक्ति प्रदान करे। हम सभी श्री शंकर तथा ज्ञानदेव की भांति पूर्ण ऊर्द्धवरेता योगी बन जायें। उनके आशीर्वाद हम सबों को प्राप्त हो !

फैशन—भयंकर अभिशाप

ब्रह्मचारी फैशन से दूर रहे। उनके लाभ के लिए ही वह लेख दिया जा रहा है। लोग फैशन के लिए मर रहे हैं। नर नारी सभी फैशन के गुलाम बन चले हैं। गाउन या वस्त्र की काट छोट में जरा सी गलती हो जाने पर लन्दन अथवा पेरिस के दण्डियों पर कोर्ट में नुक्सानी का सुकदमा पेश किया जाता है। लाहौर अथवा रावल पिंडी भी आजकल पेरिस बन चले हैं। आप शाम को वहां पर विविध प्रकार के फैशन को देख सकते हैं। अर्द्धनंगापन ही फैशन का रहस्य है। वे विज्ञान तथा स्वास्थ्य के नाम पर शरीर को खुला छोड़ते हैं। आधी छाती, आधे हाथ, आधे पैर जरूर ही खुले रहने चाहियें। यही फैशन है। अपने कंघ पर भी उनका पूर्ण नियन्त्रण है। यही उनकी भिन्नि है। हेयर ड्रेसिंग सैलून में जैसे चाहें अपने वालों को कटवाकर वे सुसज्जित कर सकते हैं। फैशन मनुष्य की कामुकता की उद्दीप्त करता है।

लाहौर में गरीब महिला भी मामूली फराक के लिए ५) रुपया गिलाई चार्ज देती है। वह इस बात की जरा परवा नहीं करता कि उसका पति किम प्रकार से इतने पैसे की व्यवस्था कर सकेगा। विचारा पति ! काम का गुलाम ! दयनीय जीव ! वह जहां तहां से उधार लेकर गुस्सवारी के द्वारा किसी न किसी तरह अपनी स्त्री को प्रसन्न