भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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फैशन-भयंकर अभिशाप

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कि उसका व्यक्तित्व ही खो गया है। देखिए अभिमानी मनुष्य का कितना पारखंड ! चमड़े का छोटा टुकड़ा, कपड़े से ढंका एक कांडनोर्ड— इन्हीं के कारण वह महान् वैरन हो जाता है और उसके अभान में उसका अस्तित्व ही उड़ जाता है। उसमें बल नहीं है। नाड़ी शांत होने लग जाती हैं। वह उसी बल के साथ आचर नातें नहीं कर सकता। वह जगत संकीर्ण हृदय तथा मंद बुद्धि वाले लोगों से भरा हुआ है। वे कल्पना करते हैं कि पगड़ी, फैशनेबल लम्बे कोट, हैट, तथा बूट से ही मनुष्य बड़ा आदमी बन जाता है। परन्तु वास्तव में आदमी वही है जो सरल है तथा जो अभिमान एवं राग-द्वेष से विमुक्त है।

पुरुषगण तथा महिलायें फैशनेबल वस्त्रों को क्यों पहनते हैं ? वे दूसरों की आंखों में बड़ा बनना चाहते हैं। वे सोचते हैं कि फैशनेबन वस्त्र पहनने से उनको सम्मान मिलेगा। न्हीं अपने पति की आंखों में सुन्दर बनना चाहती हैं। वह उसको आकृष्ट करना चाहता है। वैश्या मुन्दर फैशनेबल वस्त्रों को पहन कर अधिक आहूकों को आकृष्ट करना चाहती है। यह सब महामोह है। क्या फैशनेबल वस्त्र से सच्चा मीदयें मिल जायगा ? यह सब क्रमिस सजावट है, विनश्वर चमक-दमक तथा भूठे सौंदर्य है। यदि आपके पास कढ़ाया या सहानुभूति, प्रेम, भक्ति, तथा तितौन्ना जैसे सदगुण हैं तो आप निश्चय ही सम्मान तथा आदर प्राप्त करेंगे। आप चित्तों में ही क्यों न हो आपके पास चिरन्तन सौंदर्य होगा। फैशन अभिशाप है। यह शांति का भयंकर शत्रु है। इससे काम लोभ तथा आगुरी गृत्तियों का विकास होता है। इससे मन सांसारिक नासनाग्रों से भर जाता है। इससे दखिन्ना बढ़ जाती