ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य साधना
है। फैशन ने आपको भिखारियों का भिखारी बना डाला है। फैशन की कामना को मूलतः नष्ट कर डालिये। सरल वस्त्र पहनिये। उच्च विचार रखिये। फैशनेबल लोगों का साथ न कीजिये। उन सन्तों की याद रखिये जिनके जीवन सरल थे। तथा जो आज भी सरल जीवन यपन करते हैं। सरलता के द्वारा सदाचार जाता है। इसके दिध विचार फैलते हैं। आप आवश्यक चित्तार्थों से मुक्त हो जायेंगे। आप ध्यान तथा साधना में अधिक समय लगा सकेंगे।
सात्विक पुरुष अथवा ली ही वास्तव में सुन्दर है। उसे वाह्य तथा कृत्रिम सजावट—सोने के आभूषण आदि की—आवश्यकता नहीं है। लाखों लाख व्यक्ति उनकी ओर स्वतः ही खिंच जाते हैं। चाहे वे गरीब बच्चों में ही क्यों न हों।
अपने वस्त्र में गांधी जी कितना सरल थे। रमण महर्षि कितने सरल थे। उनके पास कौपीन सात्र ही था। वे अपने साथ स्ट्रक्सेस अथवा टूक नहीं रखते थे। वे पत्नी के समान स्वतन्त्र थे। गंगोत्री के कृष्ण राम, ब्रह्मोदय सरस्वती जैसे अवभूतों को तो कौपीन भी नहीं।
यह शरीर एक बड़े धाव के समान है। इसकी किसी भी वस्त्र के द्वारा पट्टी लगा देनी चाहिए। रेशमी कोरडार, तथा अन्य फैशनेबल कपड़ों की आवश्यकता नहीं है। इस मलिन हाड मांस के शरीर को कला पूर्ण वस्त्रों से सजाना तो मूर्खता की हद है। क्या आपने अपनी मूर्खता पहचानी ? उठिये ! फैशन त्यागिये। शपथ लीजिये। मुझे एकका वचन दीजिये कि आप इसी क्षण से सरल वस्त्र का ही प्रयोग करेंगे। आप नंगे आये थे। आप नंगे ही