भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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राग तथा उस पर विजय

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जायेंगे । आपके फैशन के वस्त्र आप से छीन लिए जायेंगे । फिर अर्थोपार्जन कर फैशनेवल पोशाक बनाने के लिए आप इतना स्वार्थपूर्ण प्रयास क्यों कर रहे हैं । अपनी मूर्खता को प ह्वानिये । विवेक करना सीखिये । आत्मज्ञान को प्राप्त कर शाश्वत शांति में विश्राम कीजिए ।

हे फैशनेवल मनुष्य, हे फैशनेवल महिलायें ! आप आत्म-हन्ता न बनें । आप इस पाखंडपूर्ण जीवन के लिए समय, शक्ति तथा आयु को क्यों बरबाद कर रहे हैं ? यह भारी दंभ है । आपके हृदयों के प्रकोष्ठ में सौंदर्यों का सौंदर्य—अमर आत्मा विभासित हो रहा है । उस आत्मा के सौंदर्य की ही छाया यहां के सारे सौंदर्य हैं । अपने हृदय को शुद्ध बनाओ । अपने मन तथा इन्द्रियों को नियंत्रित करो । किसी कमरे में शांत होकर बैठ जाओ तथा अपने अमर मित्र आत्मा का ध्यान करो । इस आत्मा का साक्षात्कार करो । तभी आप सच्चमुच्च में सुन्दर हो सकेंगे । तभी आप सच्चमुच्च धनी हो जायेंगे । तभी आप महान् हो जायेंगे ।

राग तथा उस पर विजय

राग

किसी भी प्रबल कामना को राग कहते हैं ।

राग के द्वारा मन चलायमान हो जाता है ।

किसी भी उग्र आवेग जैसे सांसारिक प्रेम, अभिमान, ईर्ष्या, लोभ इत्यादि विशेष कर लिंगात्मक आसक्ति को राग कहते हैं । कामुक भावना राग है । क्रोध का आवेग भी राग है ।