ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य साधना
राग वह आवेग है जिससे बुद्धि चलायमान हो जाती है। प्रबल कामना की वस्तु भी राग है। हम कहते हैं “संगीत राम के लिए राग बन गया है।”
यह शांति, भक्ति तथा ज्ञान का शत्रु है। यदि राग के ऊपर आप विजय न पावें तो इससे आपके सुख, स्वास्थ्य एवं शांति विनष्ट हो जायेंगे।
जो राग के वशीभूत है वह गुलामों का गुलाम है।
राग लौकिक आवेश तथा उत्तेजना है। भोगोपरांत यह आपको दुर्बल बना डालता है।
राग उपद्रवी शोड़े के समान है। बुद्धिमानी, वैराग्य तथा विवेक के द्वारा इस पर शासन कीजिये तथा अधिकाधिक शान्ती बनते जाइये। राग से मुक्त बनिये। आप स्वतन्त्र हो जायेंगे।
अपने प्रबल राग को पहले नष्टकीजिये। दूसरे प्रकारके राग सुगमतया नष्ट हो जायेंगे।
अधिनायक अथवा राजा लोगों पर शासन करता है परन्तु राग तो अधिनायक अथवा राजा पर ही शासन करता है। योगी ही राजा का अधिपति है। बही सदा मुखी, आनन्दपूर्ण तथा शांत है।
आपका उग्र राग ही आनन्द के असीम साम्राज्य के द्वार को बन्द कर देता है। इस राग को मारकर आनन्द के धाम में प्रवेश पाइये।
सब से प्रबल तो पाशविक राग है जिससे आप जगत के साथ बंधे हुए हैं।
ईश्वर साक्षात्कार के लिए राग रहिये। यह सभी सांसारिक रागों को नष्ट कर डालेगा।