भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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राग जव

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अथवा “ओ३म् नमो नारायणाय किसी भी मंत्र का जप अपनी इच्छा तथा रुचि के अनुसार कीजिये। सर्व शक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्वव्यापक आदि ईश्वरीय गुणों पर ध्यान कीजिये। नित्य गीता का एक अध्याय पढ़िये। मृत्यु भी क्यों न हो जाय पर भूट न बोलिये। जब कभी काम प्रबल हो अथवा एकादशी के दिन उपवास कीजिये। उपन्यास पाठ तथा सिनेमा दर्शन का परित्याग कीजिये। हर मिनट को उपयोग में लाहिये। प्राणायाम का अभ्यास कीजिये। काम-दृष्टि से स्त्रियों की ओर न देखिये। गलियों में टहलते समय अपने पैर के अंगूठे पर दृष्टि रखिये। तथा अपने दृष्टदेव पर ध्यान लगाये रखिये। खाते समय, टहलते समय, ओफिस में काम करते समय सदा गुरुमंत्र का जप करते रहिये। हर वस्तु में ईश्वर को देखिये। अपनी दैनिक डायरी को नित्य भरिये तथा उसका पालन कीजिये। तथा हर महीने के अन्त में मेरे अवलोकनार्थ भेज दीजिये। नोट-पुस्तक में अपने गुरुमंत्र को साफ रोज लिखिये तथा उस जव पुस्तक को भी मेरे पास भेज दीजिये।

यदि आप उपर्युक्त उपदेशों का अक्षरशः पालन करते हैं तो आप काम को वशीभूत करने में समर्थ रहेंगे। यदि आपको सफलता न मिले तो मेरी हंसी उड़ा सकते हैं। वह मनुष्य घन्य है जिसने काम को वशीभूत कर लिया है क्योंकि वह ईश्वर साक्षात्कार को प्राप्त करेगा। ऐसे महात्मा की जय हो।

शीर्षासन, सर्वांगसन तथा सिद्धासन का प्राणायाम के साथ क्रमशः अभ्यास कीजिये। काम पर विजय पाने के लिये ये सभी सहायक हैं। रात्रि में अपने पेट को अति न भरिये। गन्धि के आहार रहने होने चाहिये। कुछ फूल