भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य साधना

तथा आधा सेर दूध रात्रि के लिये उपयुक्त आहार है। इस आदर्श को रखिये। सरल जीवन उच्च विचार।

श्री शंकराचार्य के अन्य जैसे “भज गोविन्दम्” “मणिरत्नमाला” अथवा ‘प्रश्नोत्तरी’, ‘विवेक चूडामणि’ आदि का अध्ययन कीजिये। सावधानीपूर्वक भर्तृहरि के “वैराग्य शतक” को पढ़िये। वे सभी प्रेरणात्मक हैं। सदा आत्म विचार का अभ्यास कीजिये। सत्संग कीजिये। कथा, कीर्तन तथा दार्शनिक चर्चा में उपस्थित रहिये। किसी व्यक्ति के साथ अधिक नाता न जोड़िये अधिक हिलने से धूषा की उसति होती है मित्रों की संख्या न बनाइये। उनसे हिलिये मिलिये नहीं। स्त्रियों से अधिक हिलने मिलने से अन्ततः आपका सर्वनाश हो जायगा। इस बात को कभी न भूलिये। मित्र ही आपके वासविक शत्रु हैं।

काम-दृष्टि से न देखिये। दिव्य भाव को बढ़ाइये। आप अनेक बार विफल होंगे। बारम्बार इस भाव का अभ्यास कीजिये। शरीर के विकारों पर विचार कीजिये। इससे वैराग्य की दृष्टि होगी।

काम-दृष्टि के लिये अपने को दखिलत कीजिये। रात्रि को भोजन करना त्याग दीजिये। नीस माला अधिक जप कीजिये। काम से धूषा कीजिये। स्त्रियों से धूषा न कीजिये। सदा लंगोट पहनिये। भगवान् कृष्ण आपको साहस तथा बल प्रदान करें जिससे आप अध्यात्मिक मार्ग का अनुसरण कर जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर लें।

आत्म-संयम

अपने ऊपर संयम रखना ही आत्म संयम है। अपने आवेगों, रुचियों, काम-वासनाओं, इन्द्रियों तथा मन को