ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंतीन आदर्श ब्रह्मचारी
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रावण के साथ युद्ध के समय लक्ष्मण जी के लिये हनुमान जी हिमालय से संजीवनी बूटी लाये ।
हनुमान श्रीराम के परम भक्त हैं । वे महान् कर्मयोगी है । उनका शरीर वज्र के समान दृढ़ है । वे नव व्याकरण के पंडित हैं ।
श्री-हनुमान हम सबों को अपना आशीर्वाद प्रदान करें ।
श्री हनुमान जी को अनेकानेक प्रणाम ।
श्री हनुमान जी की जै !
श्री लक्ष्मण
श्री लक्ष्मण जी महाराजा दशरथ के पुत्र थे । इनकी माता सुमित्रा थी । वे श्री राम के छोटे भाई थे । वे सदा श्री राम के सेवक, आज्ञाकारी तथा अनुगामी थे ।
श्रीराम के वनवास का आदेश मिलने पर श्री लक्ष्मण ने अपनी माता, पत्नी तथा सब का त्याग कर दिया । वे श्रीराम तथा श्री सीता की सेवा में सदा तत्पर रहे ।
चौदह वर्षों तक वनवास-काल में उन्होंने आदर्श ब्रह्मचारी का जीवन का पालन किया ।
सुग्रीव ने सीता द्वारा गिराये गये आभूषणों को एवं वस्त्रों को श्रीराम को दिखाया था । श्री राम ने उनकी श्री लक्ष्मण को दिखाया था तथा पूछा था “प्रिय लक्ष्मण सीता के इन आभूषणों को पहचानो । क्या वे सीता के ही हैं ?”
लक्ष्मण ने कहा—“मैं कर्णाभूषण तथा वाज्रबन्दी को तो नहीं पहचानता परन्तु मैं पैरों की पायल को पहचानता हूँ क्योंकि मैं सदा उनके पैरों की ही पूजा करता था ।”