ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य साधना
लक्ष्मण के इन वाक्यों में ही उनकी दृष्टि का सारा रहस्य छिपा हुआ है। उनके लिए सारी स्त्रियां माता थीं। वे माता सीता के चरण की पूजा किया करते थे।
उनका भाव दिव्य था।
ब्रह्मचर्य के बल के कारण ही लक्ष्मण ने मेथनाद को मार डाला।
श्री लक्ष्मण वीर, दूरदर्शी, साहसी तथा आत्मावलंबी थे। वे अपने सिद्धांतों के पक्के थे। वे ठीक समय पर ठीक कार्य को किया करते थे। उन 'आतुर प्रेम अदभुत था।
“अपने भाइयों के प्रति प्रेम रखिये। विश्व बन्धुत्व का विकास कीजिए। ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कीजिए।”
श्री लक्ष्मण के पदचिन्हों का अनुगमन कीजिए।
श्री लक्ष्मण को अनेकानेक प्रणाम।
हम सभी उनकी कृपा को प्राप्त करें।
स्वास्थ्य तथा ब्रह्मचर्य
१. बहुत से युवक स्वप्नदोष तथा धातु क्षीणता के शिकार बने हुये हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं।—कंज, त्रति भोजन, उत्तेजक तथा वायुकारक पदार्थ, मलिन विचार, तथा अज्ञान के कारण किये गये दुष्कृत। इसके द्वारा उनके मन में एक प्रकार का भय उत्पन्न हो जाता है। परन्तु निराश होने की कोई भी बात नहीं है। संयम (लघु सात्विक आहार) शिष्ट आदतें, स्वास्थ्य के नियमों का पालन, पूर्ण सदाचार तथा शुद्ध विचार के द्वारा इस रोग का पूर्णतः निवारण किया जा सकता है।
२. सर्वप्रथम ईश्वर-भक्ति के द्वारा अपने मन को शुद्ध बनाइये। जप तथा ध्यान का अभ्यास कीजिये।