ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंस्वास्थ्य तथा ब्रह्मचर्य
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आध्यात्मिक पुस्तकों का अध्ययन कीजिये। ईश्वर की प्रार्थना कीजिये। ब्रह्मचर्य का पालन कीजिये। स्त्रियों के साथ अनुवश्यक रूप से न रहिये। उनमें केवल मातेश्वरी के ही दर्शन कीजिये। सबों के साथ आत्म-भाव रखिये। सिनेमा, श्रव्यवार, कुसंगति, बुरे गपशप आदि से दूर रहिये। मन तथा शरीर को किसी उपयोगी काम में लगाये रखिये। रोग की अधिक चिन्ता न कीजिये। यह भी गुजर जायगा। मन में जब बुरे विचार घुसें तो ईश्वर के नाम का जप कीजिये। उसकी प्रार्थना कीजिये। अनुभव कीजिये “ईश्वर की कृपा से अब मैं स्वस्थ हो रहा हूँ।”
३. चार बजे प्रातः उठिये। जप तथा ध्यान कीजिये। दस बजे रात्रि को भी सोने से पहले जप तथा ध्यान कीजिये। सोने से पहले शौच कर लीजिये। बाहूँ करवट सोइये। तीव्र हालतें में पीठ के बलें तब तक सोइये जब तक कि पूरी तरह से चंगे नहीं हो जाते। शाम का भोजन हल्का होना चाहिये। शाम को भोजन जल्दी ही कर लेना चाहिये। यदि हो सके तो ७ बजे के अन्दर ही अन्दर भोजन कर लेना चाहिये। शाम को श्रविकांश दूध तथा फल का आहार कीजिये। सूर्यास्त के बाद दोस अथवा तरल किसी भी प्रकार का भोजन कीजिये। दूध पीते समय उसमें आदी का रस मिला दीजिये। अथवा दूध को कुन्त्ली हुई आदी के साथ मिला कर पीजिये।
४. सदा कीपीन अथवा लंगोटी पहनिये।
५. चाय, काफी तथा अन्य उत्तेजक पदार्थ जैसे मिर्र, अधिक नमक, गर्म वस्तुयें, मसाले, प्याज तथा लहसुन, अधिक मिठाई तथा अचार आदि का परित्याग कीजिये। हल्का तथा सात्विक आहार कीजिये। एकादशी