ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य साधना
को उपवास कीजिये।
६. प्रातः काल ठंडे जल में गोता लगाकर स्नान कीजिये। यदि हो सके तो शायें भी भोजन के पहले ठंडे पानी से स्नान कर लीजिये।
७. मल-मूत्र के वेग को कभी न रोकिये।
८. सदाचार के नियमों का पालन कीजिये। निम्नांकित आसनों का अभ्यास कीजिये। शीर्षासन, सिद्धासन, परिचमोत्तासन, योग मुद्रा, मुजंगमासन, उद्भि-यान बन्ध तथा नौली क्रिया का भी अभ्यास कीजिये। कुछ मिनटों के लिये गहरी साँस लेने का भी अभ्यास कीजिये। प्रातः सूर्यस्तान कीजिये। धूप में टहलिये। सूर्य नमस्कार कीजिये। दौड़िये, तैरिये, दस मिनट तक के लिये हिप-बाथ कीजिये (पानी के टब में कमर तक पानी रखकर उसमें बैठिये। पैर टब से बाहर रखिये। अथवा तालाब, झील, या नदी में नामि तक पानी में रखकर स्नान कीजिये।)
९. आप निम्नांकित उपचार कर सकते हैं: एक दिन के लिये नींबू अथवा नारंगी के रस का सेवन करते हुये उपवास कीजिये। एक सप्ताह तक के लिये केवल दूध तथा फल पर ही जीवन निर्वाह कीजिये। उपयुक्त उपचार के समय दूध तथा फल लेते समय एलिमा लेना आवश्यक है।
१०. औषधि “ब्रह्मचर्य सुधा” का सेवन कीजिये। अथवा सोने से पहले पाच भर दूध के साथ कुछ रत्ती भर, कपूर का सेवन कीजिये।
ईश्वरी उ्योति आपके चेहरों से विभासित हो। ईश्वर आपको स्वास्थ्य दीर्घायु, शान्ति, सम्यक्ति तथा कैवल्य प्रदान करे।