ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
पृष्ठ 225, कुल 237 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्रह्मचर्य सम्बन्धी उपदेश
१. कामुक विचार तथा कामनाओं से मुक्ति ही ब्रह्मचर्य है। यह सभी इन्द्रियों का दमन तथा मन वचन एवं कर्म से भोग का त्याग है। यह नर तथा नारी दोनों के लिए है। ब्रह्मचर्य के द्वारा आप बल की प्राप्ति करेंगे जिससे जीवन के क्लेशों का अतिक्रमण कर सकेंगे। आपको स्वास्थ्य, दीर्घायु, वीर्य, मन की शान्ति, जीवन में सफलता, तितिक्षा शक्ति, तीक्ष्ण बुद्धि, स्मृति शक्ति, मन की धारणा शक्ति, इच्छा शक्ति, जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिये प्रचुर बल, तथा दिव्य शक्ति की प्राप्ति होगी। आप ईश्वर की भक्ति तथा परम मुक्ति को प्राप्त करेंगे। आपको ब्रह्मचर्य की महिमा का साक्षात्कार करना चाहिये। आप जीवन में ब्रह्मचर्य का संकल्प ले लीजिये।
२. आहारः—अपने आहार में 'यमित' बनिये। दूध, फल, गेहूँ (गीता अध्याय १७-८) जैसे सात्विक आहार का सेवन कीजिये। चटपटे पदार्थ लहसुन, प्यूज, मांस, मछली, अलकोहल इत्यादि कामोदीक हैं। उनका पूर्णतः परित्याग कीजिये। विलासपूर्ण भोजन का परित्याग कीजिये। सरल आहार कीजिये। मसाले, अचार, चाय तथा काफी आदि का पीना छोड़ दीजिये। धूम्रपान छोड़ दीजिये। उपवास के द्वारा ब्रह्मचर्य में सहायता मिलती है। समय समय पर उपवास लीजिये। एकादशी के दिन उपवास कीजिये। यदि यह सम्भव न हो तो दूध तथा फल का सेवन कीजिये। मिठाई खाने में थोड़ा सा संयम रखिये। अन्धु होगा कि आप चीनी का त्याग एकदम कर डालें। भूने हुये पदार्थों का सेवन करना भी त्याग दीजिये। ऐसे
(२११)