भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्य सम्बन्धी उपदेश

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बोलिए। अनुभव कीजिए कि “ईश्वर की कृपा से मैं हर दिन अधिकाधिक शुद्ध बनता जा रहा हूँ।” कामुक नेत्रों, बुरे विचारों से, स्त्रियों की ओर न देखिए। जब सौन्दर्य आकृष्ट करे तो आप ईश्वर का स्मरण कीजिए। जो कि सौन्दर्य का लक्षण है।

४. जब मन में अशुभ विचारों के बादल आने लगेँ, तो सद्ग्रन्थों का अध्ययन कीजिए। ईश्वर की प्रार्थना कीजिए तथा उसके नामों का उम्रता के साथ जप कीजिए। ऐसा भान कीजिये कि ईश्वर सदा आपके साथ ही है। इष्ट देवता की मूर्ति को अपने आँखों के सामने लाइए। अपने दिव्य स्वरूप की याद कीजिए। अलिंग, शुद्ध आत्मा के साथ अपना तादात्म्य सम्बन्ध स्थापित कीजिए। काम-वृत्ति का साक्षी मात्र बनिए। विचार कीजिए कि यह कामना किसकी है? कुछ प्राणायाम कर लीजिए। कम से कम शारीरिक ब्रह्मचर्य का तो पालन कीजिए ही यद्यपि मन पूर्णतः वश में न आवे। उपवास कीजिए। ठंडे जल से स्नान कीजिए। विवेक, इन्द्रियपरायण जीवन के क्लेशों का स्मरण कर बुरे विचारों को दूर भगा दीजिए। मन को मोड़ कर दूसरी दिशा की ओर लगा दीजिए। प्रेरणात्मक पुस्तकों को पढ़िये। वीस प्राणायाम कीजिए। कामुक विचार आ का शत्रु है। उसके साथ अपने तादात्म्य सम्बन्ध न रखिए। यह शीघ्र ही गुजर जायगा। उसके प्रति सदा उदासीन बनिए। मन को दिव्य विचारों से भर डालिए। शुद्धता का विचार कीजिए।

५. प्रातः ही 'डे जल में डुबकी लगाकर स्नान कीजिए। यदि होसके तो शायें को भी स्नान कीजिए। १५ मिनट के लिए प्रति दिन हिप बाथ भी कीजिए।