भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य का महत्व

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और मांस पेशियों को पुष्ट करता है। वह शारीरिक और मानसिक शक्ति को सुरक्षित रखने में सहायता प्रदान करता है। वह साहस और प्राण शक्ति की वृद्धि करता है। वह मनुष्य को दैनिक जीवन-संग्राम में कठिनाइयों का सामना करने के लिए बल प्रदान करता है, अखंड ब्रह्मचारी सारे संसार को चलायमान कर सकता है, वह महात्मा ज्ञानदेव की भांति प्रकृति और पंचमहाभूतों पर शासन कर सकता है।

ऐ मेरे प्रिय मित्रों! क्या आपने ब्रह्मचर्य की आवश्यकता को समझ लिया है? क्या आपने उसके वास्तविक अभिप्राय और महत्व को भली प्रकार जान लिया है? जो शक्ति आप अनेक साधनों द्वारा बड़ी कठिनाई व प्रयत्न के साथ प्राप्त करते हैं, वह शक्ति यदि नित्य नष्ट कर दी जाय, तो फिर आप किस प्रकार से बलवान और स्वस्थ रहने की आशा कर सकते हैं? जब तक पुरुष और स्त्रियां, बालक और बालिकायें सब ब्रह्मचर्य व्रत का भरसक पालन नहीं करेंगे तब तक बलवान और स्वस्थ बनना उनके लिए असंभव है।

ब्रह्मचर्य का महत्व

स्वर रहित कोई भी भाषा नहीं हो सकती। विना टाट, दीवार या अन्य आधार के आप चित्र नहीं खींच सकते। ठीक इसी प्रकार आप विना ब्रह्मचर्य के उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जीवन नहीं प्राप्त कर सकते। ब्रह्मचर्य में भौतिक और आध्यात्मिक उत्पत्ति प्राप्त होती है। ब्रह्मचर्य ग्रहण प्राप्त करने का मूल कारण है। वह शुद्ध