भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 46

२८

ब्रह्मचर्य साधना

कोई लाभ नहीं है। लिंग संबंधी विषयों को छुपाकर नहीं रखना चाहिए। यदि माता पिताओं को अपने बच्चों के सामने इस महत्वपूर्ण विषय पर बातचीत करने में लज्जा प्रतीत होती है तो वह एक नितंत अवास्तविक मर्यादा है। छुप रहने से उनकी उत्सुकता और भी अधिक बढ़ जायगी। यदि बच्चे इन सब बातों को तथा समय अच्छी प्रकार से समझ लेंगे तो, वह निश्चय है कि न तो वे कुपय-नामी मित्रों के संग से मार्ग-भ्रष्ट ही होंगे और न उनमें दुर्धसनों की उत्पत्ति ही होगी।

ऐ पाठशालाओं और विश्वविद्यालयों के शिक्षक बून्द ! अव निद्रा भंग कीजिए। विद्यार्थियों को ब्रह्मचर्य, सदाचार और धार्मिक मार्ग में प्रशिक्षित कीजिए। उन्हें सच्चे ब्रह्मचारी बनाइये। इस श्रेष्ठ कार्य को अबहेलना न कीजिये। आप इस विशिष्ट कार्य के लिए न्यायानुसार उत्तरदायी हैं। यह आपका योग है। यदि आप इस कार्य को उत्साहसहित उचित रीतिसे करें तो आपको आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति हो सकती है। सच्चे और न्यायी बनिए। सजग रहिए। बालक और बालिकाओं को ब्रह्मचर्य की आवश्यकता प्रदर्शित करते हुए उन्हें उन विविध प्रकारों से सुपरिचित कीजिए कि जिनके द्वारा वे वीर्य (जो उनमें गुप्त आत्म-शक्ति है) को सुरक्षित रख सकें।

जिन अध्यापकों ने प्रथम अपने आपको सुशिक्षित कर लिया है उन्हें चाहिए कि वे अपने विद्यार्थियों के साथ गुप्त वर्तलाप करें तथा उन्हें ब्रह्मचर्य के संबंध में नियमित रूप से अभ्यास योग्य शिक्षाएं प्रदान करें। श्रीमान् एच० पेकन्हेम बॉल्श (एस० पी० जी० कालेज, टिचना-