भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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अध्यापकों तथा माता पिताओं के कर्तव्य २६

पहली के भूतपूर्व प्रिंसिपल और वर्तमान में बड़े पादवी) अपने विद्यार्थियों के साथ ब्रह्मचर्य और आत्मसंयम संबंधी विषयों पर नियमित रूप से वार्तालाप किया करते थे।

संसार का भविष्य भाग्य (प्रारब्ध) अध्यापकों तथा विद्यार्थियों पर निर्भर है। यदि अध्यापकगण अपने विद्यार्थियों को ठीक प्रकार से धार्मिक मार्ग में शिक्षा दें तो संसार में आदर्श नागरिक, योगी, जैवन्तुओं की भरमार होगी, जो सर्वत्र प्रसन्नता, शान्ति, आनन्द और प्रकाश फैलाने में समर्थ होंगे। पाठशालाओं और कालेजों में प्राचीन काल के ब्रह्मन्तरियों के जीवन चरित्र, ब्रह्मचर्य और तत्संबंधी महा भारत और रामायण की कहानियों के प्रदर्शन, मैजिक लैण्टर्न द्वारा नियमित रूप से होने चाहिए। इससे विद्यार्थियों को उनके चरित्र निर्माण तथा उन्नत बनने में बड़ी सहायता मिलेगी। धन्य है वह जो वास्तव में अपने विद्यार्थियों को सच्चे ब्रह्मचारी बनाने के लिए प्रयत्न करता है। धन्य, धन्य है वह जो खुद नैष्ठिक ब्रह्मचारी बनने का उद्योग करता है। भगवान श्री कृष्ण उन सब पर प्रसन्न हों ! अध्यापक, प्रोफेसर तथा विद्यार्थी गण यशस्वी हों !

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