भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 48

चौथा अध्याय

ब्रह्मचारी कौन है ?

ब्रह्मचारी वह है जो पूर्ण पवित्रता का जीवन यापन करते हुए ब्रह्मसाक्षात्कार करने का प्रयत्न करता है। पवित्रता से जीवन यापन करना ही ब्रह्मचर्य है। 'अनुगीता' में कहा है "जो मनुष्य अनुशासन-कार्य के परे चला गया है और जो ब्रह्म में स्थित हुआ ब्रह्म ही की भांति संसार में भ्रमण करता है, वह ब्रह्मचारी कहा जाता है।"

ब्रह्मचारी दो प्रकार के होते हैं—एक नैष्ठिक ब्रह्मचारी जो जीवन पर्यन्त ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता है और दूसरा उपाकुर्वन् ब्रह्मचारी जो वेद अथवा शास्त्राध्ययन की समाप्ति के पश्चात् गृहस्थ बन जाता है।

केवल सच्चा ब्रह्मचारी ही भक्ति और योगाभ्यास के द्वारा ज्ञान की प्राप्ति कर सकता है बिना ब्रह्मचर्य के किसी प्रकार की भी आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है। अतः

( ३० )

ब्रह्मचर्य साधना · पृष्ठ 48, कुल 237 में से · BharatKosha