भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्य का मापदण्ड

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या ॐ मंत्र का केवल आध घंटे के लिये ही नित्य जप करता है, तो आध्यात्मिक यर्मामीटर ( मापदण्ड ) उसके ब्रह्मचर्य (पवित्रता) की सूक्ष्म स्थिति को तत्काल प्रदर्शित कर देता है। इस को आप अपनी अशुद्ध बुद्धि के कारण जान नहीं सकते। एक या दो वर्ष के लिये नित्य नियमित रूप से साधना कीजिये और फिर अपने मन की वर्तमान स्थिति को उस के पिछले वर्ष की स्थिति से मिलान कीजिये। आपको विशाल परिवर्तन प्रतीत होगा। आप अधिक शान्ति, अधिक पवित्रता, और अधिक बल और शक्ति का अनुभव करेंगे। इस में तनिक भी संदेह नहीं है। अत्यधिक प्रयत्न की आवश्यकता है।

स्त्रियों के लिये ब्रह्मचर्य

स्त्रियाँ भी ब्रह्मचर्य व्रत का आचरण कर सकती हैं। वे भी मीराबाई की भांति नैष्ठिक ब्रह्मचारिणियाँ रह सकती हैं तथा अपने आपको भगवान की सेवा और भक्ति में जुटा सकती हैं। वे मार्गा और मुलभा की नाई व्रत, विचार कर सकती हैं। यदि वे इस मार्ग का अवलंबन करेंगी तो वे ब्रह्मचारिणियाँ कही जायेंगी। गृहस्थ धर्म का अनुसरण करने वाली स्त्रियाँ सावित्री, अनसूयादि को अपना आदर्श मानती हुई पातिव्रत धर्म का पालन कर सकती हैं। जिस प्रकार लैला मज्रू में भगवान को देख कर उसका साक्षात्कार किया, ठीक उसी प्रकार वे भी अपने पतिदेवों में भगवान कृष्ण को देखकर भगवत्साक्षात्कार कर सकती हैं। वे भी आमन, प्राणायाम आदि मंत्र कियाओं का अभ्यास कर सकती हैं। उनको अपने घरों में नित्य स्तुत संदीप्तन, जप और प्रार्थना करनी चाहिए। भक्ति के द्वारा