भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य साधना

वे अपनी कामवासनाओं का सहज ही में नाश कर सकती हैं क्योंकि स्त्रियाँ स्वभाव से ही भक्ति-परायण हुस्का करती हैं। यदि कोई सद्युग्रहस्थी संतानोपत्ति तथा ेश परम्परा को चालू रखने के निमित्त ही अपनी विवाहिता स्त्री के साथ प्रसंग करता है, तो वह भी वास्तव में एक सबा ब्रह्मचारी समझा जाता है। प्रसंग इन्द्रियों की तृप्ति मात्र के लिये नहीं होना चाहिये।

पूर्वकाल में कई स्त्रियों ने अपनी ब्रह्मचर्य की शक्ति के द्वारा अनेक आश्चर्यजनक कार्य कर संसार को ब्रह्मचर्य का महत्व प्रदर्शन किया है। सती नलथिनी ने अपने पति की जीवन रक्षा के निमित्त, अपने सतीत्व के बल के द्वारा सूर्योदय को ही रोक दिया। सती अमृतसुधा ने ब्रह्मा, विष्णु, और महेश इन त्रिमूर्तियों को नन्हें-नन्हें बच्चे बना दिये जब उन्होंने उससे निर्वाण-भिन्ना की प्रार्थना की। वह केवल उसके पातिश्रत धर्म का ही बल था कि जिसके द्वारा उसने इन प्रसिद्ध देवताओं को इस प्रकार बालक रूप में परिवर्तित कर दिया। सति सावित्री ने अपने पातिश्रत धर्म के द्वारा अपने पति सत्यवान को यम-पाश से मुक्त करा कर पुनः जीवित कराया। स्त्रीत्व का ऐसा ही महत्व है। ब्रह्मचर्य की ऐसी ही शक्ति है। वे स्त्रियाँ जो पवित्रता तथा सतीत्व के द्वारा ग्रहस्थ जीवन यापन करती हैं, वे भी अमृतसुधा, नलथिनी या सावित्री बन सकती हैं।

गृहस्थियों के लिये ब्रह्मचर्य

वधोष संसार में विविध प्रकार के प्रलोभन और मन को व्यथित करने वाली अनेकानेक बातें हैं। तथापि मनुष्य के लिये संसार में रहते हुये ब्रह्मचर्य का अभ्यास