भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्य सार्धना

से प्रार्थना करता हूँ कि कृपया मुझे आप अपनी श्रुतमति प्रदान करें कि मैं अपने को उस से किस प्रकार मुक्त करूँ।

मन बड़ा नीति कुशल है। वह भीतर पुनः कुछ उपद्रव मचाने का प्रयत्न करेगा। उसकी गूढ़ रीतिर्षा तथा उसके गुप्त व्यापारों को समझना अत्यन्त कठिन है। इसके लिये योग्य बुद्धि से सावधानी पूर्वक बार बार अंतरावलोकन तथा पूरी पूरी देख रख की आवश्यकता है। जब कभी भी आपको मन में अशुद्ध विचारों के साथ किसी स्त्री के स्वरूप की कल्पना हो उठे तो आप “अ० दुर्गा देव्यै नमः” मंत्र का बार बार उच्चारण करें और मानसिक प्रणाम करें। शनैः शनैः पुराने अशुभ विचार नष्ट हो जायेंगे। इसी प्रकार जब कभी किसी स्त्री को देखने का अवसर आ बने तो उस समय भी इसी भाव को रखते हुये इसी मंत्र का मानसिक उच्चारण करें। आप की दृष्टि पवित्र हो जायगी। संसार में सभी स्त्रियाँ देवी (मातृ) स्वरूप हैं।

आप कबतक कामुक गृहस्थी बने रहेंगे ? क्या आपु पर्यन्त ? क्या आपको खाने, सोने और संतानोत्पत्ति के अतिरिक्त संसार में कोई अन्य उत्तम कार्य नहीं है ? क्या, आप, आत्मा के नित्य-सुख का अनुभव करना नहीं चाहते ? आप सांसारिक भोग विलास पर्याप्त मात्रा में प्राप्त कर चुके हैं। आप गृहस्थी की स्थिति से परे जा चुके हैं। जब तक आप युवा हैं, आप त्रयायोग हो सकते हैं, परंतु अब नहीं, जब कि आप के संतान उत्पन्न हो चुकी है। अब संसार में रहते हुये वानप्रस्थ तथा मानसिक संन्यास की अवस्था के लिये तैयार हो जाइये। सर्व प्रथम अपने हृदय को रेंगिये। मन को शिक्लित कीजिये। मन से