भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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पांचवां अध्याय

कामवासना की प्रबलता

आजकल बच्चों के बच्चे उत्पन्न होते हैं। बाल विवाहों के कारण शारीरिक पतन तथा वीर्य का असामयिक क्षय होता है। बुद्धि के अभिमानी मनुष्य को पशु से शिक्षा लेनी चाहिये। सिंह, हाथी, बैल तथा अन्य शक्तिशाली पशुओं का आत्म नियंत्रण मनुष्यों से कहीं अच्छा है। सिंह वर्ष में केवल एक बार ही भोग करता है गर्भाधान के पश्चात् मादा पशु कभी भी नर पशुओं को अपने पास न आने देंगे जब तक कि उन के बच्चे दूध न छोड़ दें तथा वे स्वयं पुनः स्वस्थ और बलवान न हो जायें। यह केवल मनुष्य ही है जो प्रकृति के नियमों की अवहेलना करता है और फलतः अनेकानेक रोगों का शिकार बनता है। उसने अपने आप को पशुओं से भी अधिक नीचे पतित कर दिया है, आहार, निद्रा, भय और मेषुन-ये पशुओं

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