ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
पृष्ठ 64, कुल 237 में से
संदर्भ में पढ़ें४६
ब्रह्मचर्य साधना
दिन के शारीरिक कार्य की शारीरिक शक्ति के बराबर होती है। पाप, डकैती, बलात्कार, अपहरण, आक्रमण, हत्या आदि कार्यों का इतिहास यदि आप पढ़ें तो आपको विदित होगा कि जितने भी मुकद्दमे आज कल सेशन कोर्ट के समक्ष परीक्षा के निमित्त आते हैं, उन सबका मूल कारण कामवासना ही है !
पतंगा अग्नि या दीपक को सुन्दर पुष्प समझ कर उसकी ओर भागता है और अपने आपको भस्म कर डालता है। ठीक इसी प्रकार कामी मनुष्य, यह समझ कर कि उसको वास्तविक आनन्द प्राप्त होगा, स्त्री के मिथ्या रमणीय सौंदर्य की ओर दौड़ता है और अपने आपको कामामि में भस्म कर डालता है। मनुष्य ने अपने को काम की कठपुतली बनाकर अत्यन्त नीचे गिरा दिया है। शोक है कि मनुष्य एक अनुकरण करने वाला यंत्र बन गया है। उसने अगना विचार शक्ति का हास कर डाला है। वह दासत्व के अत्यन्त नीच व्यवहार में डूब गया है। यह कैसी दयनीय अवस्था है ! यह कैसी वास्तविक शोचनीय दशा है ! यदि वह चाहता है कि वह अपना वास्तविक महत्व और खोई हुई दैविक स्थिति पुनः प्राप्त करे तो उसे चाहिये कि वह अपनी प्रकृति का पूर्णतया परिवर्तन करे, अपनी कामवासना का सर्वथा त्याग कर अपने मन में शुद्ध सात्विक विचारों को भरे तथा नित्य नियमितरूप से ध्यान का अभ्यास करे। कामवासना को भगवत् प्राप्ति की शुभेच्छा में परिवर्तन करना ही परमानंद प्राप्ति का एक मुख्य प्रबल साधन है।
जब मनुष्य काम के द्वारा उत्तेजित है तो प्राण कंक्ति