ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकामवासना की प्रबलता
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सकता है और लूला मनुष्य भी पहाड़ी की शिखर पर चढ़ सकता है, यथा—
“भूकं करोति वाचालं पंगुम् लंघ्यते गिरिम् । यत् कृपा तमहंवेदं परमानन्द माधवम् ॥”
केवल मानवी प्रयत्न से काम नहीं चलेगा । भगवद-कृपा की परम आवश्यकता है । भगवान् उनको सहायता प्रदान करते हैं, जो मनुष्य अपने पैरों पर खड़े होते हैं । यदि आप संपूर्णतया आत्म-समर्पण करते हैं तो मां दुर्गा आपकी साधना स्वयं करेगी । इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है । आपके पुराने संस्कार तथा वासनायें कैसी ही प्रबल क्यों न हो, आपकी कामवासना समूल नष्ट हो जायगी यदि आप ध्यान, मन्त्र-जप, सात्विक भोजन, सत्संग, प्राणायाम का अभ्यास, शीर्षासन और सर्वांगासन, धार्मिक ग्रन्थों का अध्ययन, आत्मविचार (मैं कौन हूँ ?) और किसी पवित्र नदी के तट पर कुछ समय के लिये एकान्त वास-नित्य नियमित रूप से करें । सत्य, रजम् और तमम को दवा देता है । आपको किसी भी अवस्था में निराशा होने की आवश्यकता नहीं है । ध्यान में पूर्णतया तत्पर रहिए, मार को मारिए और रग में विजय प्राप्त कीजिये । देदीप्यमान योगी की भांति चमक उठिये । आप नित्य युद्ध आत्मा हैं । हे विश्वराज ! इसका अनुभव कीजिये ।
जिस प्रकार दूध से दही बनता है, ठीक उसी प्रकार काम से क्रोध उत्पन्न होता है । यदि काम या इच्छा की पूर्ति नहीं हुई और यदि उस इच्छा पूर्ति के मार्ग में कोई बाधक या उपधिष्ट हुआ, तो कामी मनुष्य अवश्य रोप-गुफा में कैदित हो जायगा । कामी मनुष्य कैधित हो जाता