ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें(४) शान्ति मन्त्रः
हरिः ॐ । वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता मनो मे वाचि प्रतिष्ठितमाविरावीर्मे एधि वेदस्य म आणीस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीरनेनाधीतेनाहो- रात्रान्संद्वागम्युतं वद्विष्यामि सत्यं वद्विष्यामि तन्मासवतु वक्तारमवतवतु मामसवतु वक्तारमवतु वक्तारम् ॥
। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ।
हरि ॐ । मेरी वाणी मेरे मन में प्रतिष्ठित है मेरा मन मेरी वाणी में प्रतिष्ठित है ब्रह्मन्, तू मेरे लिये प्रगट हो । हे मन तथा वाणी तू मुझे उपनिषदों के सत्य को ग्रहण करने में समर्थ बनावे । मुनी हुई वस्तु पुनः मुझसे विस्मृत न बने मैं अध्ययन में दिन तथा रात एक करता हूँ, मैं सत्य का विचार करता हूँ । मैं सत्य बोलता हूँ, वह मेरी रक्षा करे, वह मेरे गुरु की रक्षा करे, वह मेरी रक्षा करे, गुरु की रक्षा करे । गुरु की रक्षा करे ।
॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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