भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्य साधना

तो केवल प्राचीन योग-प्रणाली के द्वारा ही हो सकती है। 'नास्ति योगात् परं बलम्'—योगबल के अतिरिक्त अन्य कोई भी बल नहीं है। यदि आप इस पुस्तक में बताये हुये विभिन्न साधना का नित्य नियमित रूप से अभ्यास करेंगे तो आपको अवश्य सफलता प्राप्त होगी।

दुराचारी जीवन से हानियाँ

आज कल हम क्या देखते हैं? पुस्र और स्त्री, बालक और बालिकायें, अशुद्ध विचार, कामवासना और लुट्ट इन्द्रिय-जनित सुख रूपी सागर में गोता लगा रहे हैं। यह वास्तव में अति शोचनीय दशा है।

कुछ बालकों की कहानियाँ सुनकर आपको वास्तव में दुःख होगा। अस्वाभाविक साधनों के द्वारा वीर्य के अधिक नष्ट हो जाने के कारण, खिन्न चित्त हो कर अपने अन्धकारमय दीन हीन जीवन की शोचनीय दुःखद कथाओं का वर्णन करने के लिए, मेरे पास अनेक कालेज के छात्रगण आया करते हैं। काम के नशे तथा काम की उत्तेजना के कारण उनकी विवेक बुद्धि नष्ट हो गई है। जो शक्ति आप कई सप्ताह और महीनों में प्राप्त करते हैं, उसको अनायास ही क्षणिक सुख के लिए नष्ट कर देना क्या बुद्धिमान्नी है?

मैथुन से अत्यधिक शक्ति का नाश होता है। मैथुन से समूचा नाड़ी मंडल प्रभावित होकर शिथिल पड़ जाता है। स्मरण शक्ति का ह्रास, असामयिक वृद्धावस्था, नपुंसकता, नाना प्रकार के नेत्र-रोग तथा अनेक प्रकार के नाड़ी मंडल संबंधी रोग, वीर्य के अधिक नष्ट होने के कारण उत्पन्न होते हैं। शौर्य और शक्ति के सहित