ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंदुविचार
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है। वह एक बिजली घर है। नाड़ियां बिजली के तार हैं जिनके द्वारा उत्तेजना रूपी बिजली धारायें हाथ पैरादि नाना प्रकार के इन्द्रियगण तक पहुँचाई जाती हैं। यदि आप नींबू या इमली के रस को किसी सोने के बर्तन में रखते हैं, तो वह दूषित या विषैला नहीं होता। यदि आप उसे पीतल या तांबे के बर्तन में रखते हैं तो वह अवश्य दूषित होकर विषैला हो जायगा। ठीक उसी प्रकार यदि किसी ऐसे मनुष्य के मत में जो नित्य ध्यान का अभ्यास करता है कुछ विषय वृत्तियां उत्पन्न हों भी तो वे उसमें विकार या कामुक उत्तेजना उत्पन्न नहीं करतीं और न उसे अपवित्र ही बना सकती हैं। इसके विपरीत अशुद्ध मनस वाले मनुष्यों के भीतर यदि विषय वृत्तियां हैं तो वे उनमें विषय पदार्थों के देखते ही, कामोत्तेजना उत्पन्न कर देंगी।
काम, कोष, लोभ, द्वेष, दंभ, अहंकार, चालाकी, कूटनीति आदि आंतरिक कंटक कहे जाते हैं। कुछ बाहरी कंटक भी हैं जैसे कुसंगति, अश्लील चित्र, उपन्यास, अश्लील गायन, सिनेमा आदि। कोई भी वस्तु जो मन में अशुद्ध विचार उत्पन्न करे, वास्तव में वही कुसंगति है। पशुओं को भोग करते देखना भी एक प्रकार की कुसंगति है, क्योंकि उससे मन में कामवासनायें उत्तेजित हो जाती हैं। क्या आप नहीं जानते कि दो मछलियों को भोग करते देख एक मूषिक के मन में भी कामवासना उत्तेजित हो गई थी ?
मुख्य प्राण के कंपन होने के कारण मन में विचार का संचलन होता है। यह विचार शक्ति महान् विद्युत