भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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वासनाओं की इतिश्री कीजिये

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अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है जो केवल इस उपद्रवी मन की ही रचना है। विवेक आपको उस इच्छा का तत्काल त्याग कर देने के लिए तथा आध्यात्मिक साधना का अभ्यास करने के लिए सुसम्मति प्रदान करेगा। वह संकल्प-शक्ति की सहायता के द्वारा आपकी इच्छा को तत्काल समूल नष्ट कर देगा। दुष्ट काम और प्रलोभन को नष्ट करने के लिए ज्ञान मार्ग के साधक के लिए विवेक और संकल्प-शक्ति ये दो प्रबल शस्त्र हैं।

यह आक्रमण आंतरिक आक्रमण है। बाहर की ओर से भी आक्रमण होना चाहिए। वह आक्रमण दम यानी इन्द्रिय-निग्रह के द्वारा किया जाता है। विषय-संवेदन को बाहर से इन्द्रियों के मार्गों द्वारा अपने मन के भीतर प्रवेश ही न होने दीजिए। यह भी आवश्यक है। केवल शम पर्याप्त नहीं है। दम के अभ्यास से इन्द्रियों को शान्त रखना चाहिए। उदाहरणार्थ ज्योंही आपके मन में कामवासना उत्पन्न हो, त्योंही आप उसे जहां का तहां भीतर ही भीतर शम (वासना त्याग) के द्वारा समूल नष्ट कर डालिये। जब कभी आपको इधर-उधर घूमते फिरते किसी लौ/पुरुष को देखने का अवसर प्राप्त हो तो आप दम के अभ्यास के द्वारा तुरंत अपनी काम-दृष्टि को यहां मे हटाकर अयोग्य कामेच्छा का सर्वथा त्याग कर दीजिए। मन के नियंत्रण में दम, शम का ही पूरक है। वासनाओं के त्याग में दम एक प्रकार से सहायता प्रदान करता है। मोक्ष की तीव्र कामना के द्वारा लौकिक इच्छायें, वासनायें और तृष्णाओं के नष्ट करने में अवश्य सहायता मिलती है। शुभ वासनाओं के द्वारा अशुभ वासनाओं