ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना
Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana
प्रेमवल्लभा शरण द्वारा
स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)
DevanagariHindipublished74 पृष्ठ
पृष्ठ 14, कुल 74 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 14
स वञ्चितो बतात्मधृक् कृच्छ्रेण महता भुवि ।
लब्ध्वापवर्ग्य मानुष्यं विषयेषु विषज्जते ॥ (श्रीमद्भगवद्गीता ४/२३/२८)
‘इस भूलोक (कर्मभूमि) में बड़ी कठिनाई से प्राप्त मोक्षप्रद मनुष्य शरीर को पाकर के भी विषयों में जो आसक्त हो जाता है, वह आत्महत्यारा है और माया के द्वारा ठगा गया है ।’
अतः कुछ समय के लिए हमको ये मनुष्य जीवन दिया गया है, इसमें चाहे हम दुराचार करके नारकीय यातनाओं को भोगने की तैयारी कर लें या संयम-सदाचार पूर्वक चलकर प्रभु की उपासना करके, संसृति से हमेशा के लिए मुक्ति प्राप्त कर लें ।
Scanned with CamScanner