ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना
Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana
प्रेमवल्लभा शरण द्वारा
स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंरक्षति रक्षितम्' जो अपने वीर्य की रक्षा करता है, वह (वीर्य) भी उम्र का संरक्षण करता है । दीर्घजीवन और उत्तम स्वास्थ्य के लिए ब्रह्मचर्य साधना बहुत आवश्यक है । 'नष्टे शुक्ले सर्व रोगा भवन्ति ।' वीर्य के अभाव में ही अनेक रोग उत्पन्न होते हैं ।
अतः जो अपने स्वास्थ्य और आरोग्य को स्थिर रखते हुए मुखां जीवन को व्यतीत करने के इच्छुक हैं, उन्हें प्रयत्नपूर्वक वीर्यरक्षा करनी चाहिए ।
ब्रह्मचर्य-प्रतिष्ठायां वीर्य-लाभो भवत्यपि ।
सुरत्वं मानवो याति चान्तेयाति परांगतिम् ॥
'ब्रह्मचर्य का पालन करने से वीर्य का लाभ होता है । ब्रह्मचर्य की रक्षा करने वाले मनुष्य को सुरत्व की प्राप्ति होती है, और अन्त में परम गति भी उसे मिलती है ।
मृत्युव्याधिजरानाशी पीयूषं परमौषधम् ।
ब्रह्मचर्यं महद्यत्वं सत्यमेव वदाम्यहम् ॥
शान्तिं कान्तिं स्मृतिं ज्ञानमारोग्यञ्चापि सन्ततिम् ।
यद्वच्छति महद्भर्मं ब्रह्मचर्यं चरेदिह ।
'मृत्यु, व्याधि और जरा को नाश करने वाला, अमृत के समान महौषध ब्रह्मचर्य है । इसलिए शान्ति, कान्ति, स्मृति, ज्ञान और आरोग्य तथा संतान, इनकी जो पुरुष इच्छा करता है, वह ब्रह्मचर्य का पालन करे ।'
अखण्ड नैष्ठिक ब्रह्मचारी श्रीभीष्म पितामह धर्मराज युधिष्ठिर को ब्रह्मचर्य का उपदेश देते हुए कहते हैं कि -
आजन्म भर्गाद्यस्तु ब्रह्मचारी भवेदिह ।
न तस्य किंचिदप्राप्यमिति विद्धि नराधिप ।
बहु-कोटि ऋषीणाञ्च ब्रह्मलोके वसन्त्युत ॥
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