ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना
Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana
प्रेमवल्लभा शरण द्वारा
स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)
DevanagariHindipublished74 पृष्ठ
पृष्ठ 19, कुल 74 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 19
‘जो आजन्म ब्रह्मचारी रहता है उसे संसार में कुछ भी दुःख नहीं होता है और उस पुरुष को कोई वस्तु दुर्लभ नहीं । ब्रह्मचर्य के प्रभाव से करोड़ों ऋषि ब्रह्मलोक में वास कर रहे हैं ।’
उपनिषदों में भी यही बात लिखी है –
तद्य एवैतं ब्रह्मलोकं ब्रह्मचर्येणानुविन्दन्ति,
तेषामेवैष ब्रह्मलोकः, तेषां सर्वेषु लोकेषु कामचारे भवति ॥
(छान्दोग्योपनिषद्)
‘जो इस ब्रह्मलोक को ब्रह्मचर्य के द्वारा जानते हैं, उन्हीं को यह ब्रह्मलोक प्राप्त होता है तथा जो ब्रह्मचर्य से युक्त पुरुष हैं, वे सभी लोकों में विचरण कर सकते हैं ।’
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