भारतकोश
ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana

प्रेमवल्लभा शरण द्वारा

स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)

DevanagariHindipublished74 पृष्ठ

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‘हस्त-मैथुन’ एक प्राणघातक रोग

यह एक महाविनाशकारी प्राणघातक रोग है और इस रोग से करीब ९९ प्रतिशत लोग ग्रसित हैं। कुशिक्षा और कुसंग के कारण अज्ञानतावश आज केवल मनोरंजन के लिए बालक एवं नवयुवक हस्त-क्रिया के द्वारा अपने ब्रह्मचर्य का नाश करके, बाल्यावस्था से ही नष्ट हो रहे हैं। अब न वे गृहस्थ-जीवन के लायक रह पा रहे हैं और न ही विरक्ति लायक; क्योंकि वीर्य ही इस शरीर का राजा है और इसके क्षीण होने से शरीर दुर्बल और निस्तेज हो जाता है। वीर्य की एक भी बूँद निकालने का मतलब है शरीर को निचोड़कर रस निकालना। अतः ‘बिन्दु-पात’ सब प्रकार की अवनति का मूल है।

इसीलिये हस्तमैथुन के द्वारा या और भी किसी माध्यम से जो लोग वीर्यपात करते हैं, वे सावधान हो जाँएँ क्योंकि वे बिल्कुल अपनी सत्य का वर्णन कर रहे हैं और ये अनिष्टकारी चेष्टा उन्हें पुनः मनुष्य शरीर प्राप्त नहीं होने देगी।

अतः अभी भी मौका है सँभलने का। बिन्दु-नाश करना बिल्कुल बंद कर दो अन्यथा यह कुकृत्य तुम्हें जर्जर कर देगा, निकृष्टभावना से युक्त कर देगा, उत्साहहीन और खोखला कर देगा। तुम्हारी पारमार्थिक या व्यवहारिक अवनति का प्रधान कारण भी यही हस्त-मैथुन क्रिया है। गृहस्थ में तो जब पति-पत्नी का संयोग होता है, तब वीर्यपात होता है किन्तु इस हस्त-क्रिया के द्वारा लोग इसमें प्रतिपल जल रहे हैं, मर रहे हैं। ये क्रिया इतना कमजोर और परास्त कर देगी कि आप भगवन्मार्ग पर भी नहीं चल सकते हो क्योंकि ‘आरोग्यमूलं खलु धर्मसाधनम्’ नीरोग व्यक्ति ही भजन-साधन कर पाता है।

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