ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना
Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana
प्रेमवल्लभा शरण द्वारा
स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंवीर्य का पाचन नहीं होता है, यह ओज एवं तेज का रूप धारण कर लेता है। इसी कारण जो संयम से चलता है तो उसका एक अलग ही स्वरूप होता है, उसमें एक अलग उत्साह, अलग तेज, अलग चमक होती है।
अतः सावधान हो जाओ, इसको खिलवाड़ मत समझो। एक महीने की कमाई ससम धातु वीर्य (जो भगवत्स्वरूप है, जीवनी-शक्ति है) को लोग एक दिन में कितनी बार नष्ट कर रहे हैं। इसे मूर्खता नहीं कहा जाएगा तो क्या कहा जाएगा, जो इतनी कीमती वस्तु को केवल मनोरंजन के लिए बर्बाद कर रहे हो। ये घोर पतन का रास्ता है। ये कृत्य तन, मन और धन सबका नाश करने वाला है। सम्पूर्ण शरीर का सार है ब्रह्मचर्य। ब्रह्मचर्य के द्वारा ही हर परिस्थिति, हर द्रन्द्व को सहने की सामर्थ्य मिलती है। आज जितने मनुष्यों या साधकों की दुर्दशा हो रही है, उसका मूल कारण है शास्त्र विरुद्ध आचरण और ब्रह्मचर्य का नाश। यदि ब्रह्मचर्य की रक्षा की जाए तो ब्रह्मचर्य बहुत बड़ा अमृततत्व है लेकिन मूर्खता के कारण लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, यदि गृहस्थी हो तो भी संयम से चलो।
जरा विचार करो, आप रात दिन पशुता का व्यवहार करके मलिन मन के द्वारा शान्ति प्राप्त करना चाहते हो, आनंद की अनुभूति करना चाहते हो तो कैसे हो सकता है? आज यौवनावस्था है, समझ में नहीं आ रहा लेकिन ये आदत कल कहाँ पहुँचा देगी सोच भी नहीं सकते हो। जब पहुँच जाओगे फिर कोई रास्ता नहीं है बचने का। कितने ऐसे बच्चे हैं जो इस बात से दुखी हैं कि मैं क्या करूँ? आत्महत्या कर लूँ। देखो पहुँचा दिया उन्हें मन ने वहाँ, जो अंतिम दुर्गति का केन्द्र है। यदि अभी सावधान नहीं हुए तो आप कुछ दिनों बाद ऐसे-ऐसे रोगों से ग्रसित हो जायेंगे कि ठीक से चलने लायक भी नहीं रहेंगे।
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