ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना
Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana
प्रेमवल्लभा शरण द्वारा
स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)
पृष्ठ 38, कुल 74 में से
संदर्भ में पढ़ेंहोगी। जो पति के प्रतिकूल चलती है, वह जहाँ भी जाकर जन्म लेती है, वहीं भरी जवानी में विधवा हो जाती है और यदि स्त्री पतिव्रत धर्म से चलती है, तो उसे बिना कुछ साधना किये इतने से ही परम गति की प्राप्ति हो जाती है -
बिनु श्रम नारि परम गति लहई। पतिव्रत धर्म छाड़ि छल गहई ॥
जो स्त्री छल छोड़कर पतिव्रत धर्म को ग्रहण करती है, वह बिना ही परिश्रम परम गति को प्राप्त करती है।
अतः स्त्री-पुरुष दोनों को व्यवहार से बचना चाहिए क्योंकि -
दुराचारो हि पुरुषो लोके भवति निन्दितः।
दुःखभागी च सततं व्याधितोऽल्पायुरेव च ॥ (मनु स्मृति)
‘दुराचारी मनुष्य संसार में निन्दा का पात्र, सदा दुखी, रोग-ग्रस्त और अल्पायु होता है।’
अतः अगर भ्रष्ट आचरण करोगे तो तुम्हारी संतान कैसे बलवान होगी। गृहस्थी में भी जाना है तो तब तक पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें जब तक आप गृहस्थ धर्म से युक्त न हो जाएँ और यदि विरक्त हैं तो आजीवन ब्रह्मचर्य धारण करें; थोड़े दिन यद्यपि जलन होगी लेकिन इसको यदि आप सह जायेंगे तो बहुत आनंद में रहेंगे, बड़ी शीतलता मिलेगी, द्वंद्वों से लड़ने की सामर्थ्य आयेगी, भगवत्प्राप्ति का उत्साह होगा।
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