भारतकोश
ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana

प्रेमवल्लभा शरण द्वारा

स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)

DevanagariHindipublished74 पृष्ठ

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रहने वालों के साथ से होता है ।’ (यही सूत्र स्त्री साथकों के लिए भी है ।)

(२) कीर्तन – स्त्रियों के रूप, गुण और अंगों की चर्चा करना अथवा विषय-सम्बन्धी गीत गाना या गंदी बातें करना । काम सम्बन्धी चर्चा विषयी पुरुषों के पास ज्यादा मिलती है । इसीलिये उनका संग विलकुल हानिकारक है ।

(३) केलि – स्त्रियों के साथ खेल खेलना, हँसी-मजाक करना, अधिक बैठना-उठना आदि । बहुत लोगों की आदत होती है कि वे स्त्रियों में बैठकर हँसी-मजाक करते हैं, इन बातों से काम-वासना बढ़ती है, अंगों में उत्तेजना उत्पन्न होती है तथा वीर्य अपने स्थान से च्युत होता है ।

(४) प्रेक्षण – कामुकता की दृष्टि से स्त्रियों को घूरना, छिपकर के उन्हें देखना ।

(५) गुह्य भाषण – किसी स्त्री से एकांत में बातचीत करना । साधक को कभी भी ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए । भले ही वह भगवत्-सम्बन्धी वार्ता ही क्यों न हो ? सबके सामने करे एकांत में नहीं; क्योंकि पहले अपनी स्थिति देख ले कि क्या अभी हमारा पुरुषत्व का अभिमान सर्वथा नष्ट हो गया है अर्थात् किसी भी भावना से आपके हृदय में ये भाव नहीं आयेगा कि यह भोग्य-वस्तु है, तो फिर प्रभु की आप पर अपार कृपा है फिर त्रिभुवन में आपको कोई पतित नहीं कर सकता क्योंकि –

‘न हि स्वात्मारामं विषयमृगतृष्णा भ्रमयति ॥’

‘ब्रह्मानन्दे निमग्नस्य विषयाशा न तद्भवेत् ॥’

जो आत्माराम बोधसंपन्न महापुरुष हैं जब उन्हें सर्वत्र यच्चिदानंद प्रभु दीख रहे हैं तो कौन उनको भ्रष्ट कर सकता है, लेकिन जब तक स्त्रीत्व-पुरुषत्व का अहं है, तब तक विपरीत शरीरधारी साधक

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