भारतकोश
ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana

प्रेमवल्लभा शरण द्वारा

स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)

DevanagariHindipublished74 पृष्ठ

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गृहस्थ उपासक को भी अपनी पत्नी के सिवाय कभी भी किसी स्त्री से एकांत में संभाषण नहीं करना चाहिए ।

श्रीकपिल भगवान् ने कहा है कि 'जो पुरुष योग के परम पद पर आरूढ़ होना चाहता हो अथवा जिसे मेरी (प्रभु की) सेवा के प्रभाव से आत्मा-अनात्मा का विवेक हो गया हो, वह स्त्रियों का संग कभी न करे; ऐसा करने पर उसका पतन सुनिश्चित है ।'

अतः साधक को सदैव मार्ग में दृष्टि झुकाकर के चलना चाहिए ताकि कोई ऐसा दृश्य सामने न आ जाए जो विचलित कर दे । अजामिल के साथ यही तो हुआ था, वह बड़ा सदाचारी और समस्त दिव्य सद्गुणों से सम्पन्न, शास्त्र और गुरु की आज्ञा में चलने वाला उच्च कोटि का साधक था लेकिन एक दृश्य (वैश्या और शूद्र के विहार) ने उसको कितना पतित बना दिया ।

इसी तरह सौभरी ऋषि यमुना जल में तप कर रहे थे उनको भी एक दृश्य (मछली के विहार) ने ऐसा विचलित किया कि उन्हें मान्धाता की ५० कन्याओं से विवाह करना पड़ा और ५ हजार संतानों की उत्पत्ति हुई, बाद में बहुत पछताए और बोले -

अहो इमं पश्यत मे विनाशं तपस्विनः सच्चरितव्रतस्य ।

अन्तर्जले वारिचरप्रसङ्गात्प्रच्यावितं ब्रह्म चिरं धृतं यत् ॥

सङ्गं त्यजेत मिथुनव्रतिनां मुमुक्षुः

सर्वान्मना न विसृजेद् बहिरिन्द्रियाणि ॥

एकश्ररन् रहसि चित्तमनन्त ईशे

युञ्जीत तद्वतिषु साधुषु चेत् प्रसङ्गः ॥ (श्रीमद्भा० ९/६५/५०,५१)

'तपस्वी, सदाचारी, व्रतों का पालन करने वाले मेरे इस विनाश को देखो । जल के अन्दर मछली के प्रसंग से मैंने अपने ब्रह्मतेज को नष्ट कर दिया, जो चिरकाल से धारण किया था । मोक्ष का इच्छुक

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