भारतकोश
ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana

प्रेमवल्लभा शरण द्वारा

स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)

DevanagariHindipublished74 पृष्ठ

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‘रसयुक्त (फल, शकर, बताशा व दुग्धादि), चिकने (घी, किसमिस आदि), स्थिर रहने वाले (जिस भोजन का सार शरीर में बहुत काल तक रहे) तथा हृदय को बल देने वाले आहार – ये सात्विक आहार हैं। इनसे आयु, सत्त्वगुण, बल, आरोग्य, सुख और प्रीति की वृद्धि होती है।’ कदम्ललवणाल्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः।

आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः ॥ (१७/८)

‘कड़वे, खट्टे, लवणयुक्त, बहुत गरम, तीखे, रूखे, दाहकारक आहार – ये राजस आहार हैं। ये दुःख, शोक तथा रोगों को उत्पन्न करने वाले हैं।’ अर्थात् ब्रह्मचर्य के लिए बहुत हानिकारक हैं।

ब्रह्मचर्य में लाभप्रद आहार –

अन्न - जौ, गेहूँ, साठी, मूँग, अरहर, चना आदि। फल - (ऋतु के फल) सेब, अमरुद, पपीता, नासपाती, केला, नारियल, सिंघाड़ा, अनार, बेल आदि। शाक - (ऋतु के अनुसार) घिया (लौकी), परवल, तोरई, मटर, शिमला मिर्च, कद्दू, टिंडा, मूली, खीरा आदि।

ब्रह्मचर्य के लिए निषिद्ध खाद्य पदार्थ –

लाल मिर्च, गरम मशाला, राजमा, सोयाबीन एवं सोयाबीन बड़ी, मसूर दाल, साबुद उड़द, मशरूम, गाजर, चुकन्दर, मूगफली, काजू, बादाम, अखरोट, गुड़, प्याज, लहसुन, अचार, अत्यधिक उष्ण (गर्म), खट्टे, मीठे, नमकीन एवं तले हुए पदार्थ, पिज्जा, बर्गर, कचौड़ी-समोसा, मालपूआ, गरिष्ठ आहार, कोल्ड ड्रिंक्स एवं नशीले पदार्थ आदि।

ब्रह्मचर्य-साधना करने वाले को २४ घंटे में ज्यादा-से-ज्यादा दो बार भोजन करना चाहिए और जितनी भूख हो उससे आधा भोजन करना चाहिए, पेट भरकर खाना उचित नहीं है। दिन का भोजन दोपहर १ बजे से पूर्व एवं रात्रि का भोजन ८ बजे से पहले कर लेना चाहिए।

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