ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना
Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana
प्रेमवल्लभा शरण द्वारा
स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंउठते ही उसको पियें । फिर कुछ समय थोड़ा टहलें अथवा बज्रासन पर बैठें; तत्पश्चात् दैनिक कृत्य शौच-स्नानादि करें ।
नहाने से पहले नाभि पर जलधार डालें, फिर अच्छे से घर्षण करके नहायें, और ज्यादा गर्म पानी का उपयोग स्नान के लिए न करें, प्रतिदिन २ बार स्नान करें । प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर कुछ व्यायाम-प्राणायाम आदि करें ।
जिसे ब्रह्मचर्य का पालन करना है उसे नियमित व्यायाम करना अर्थात् शरीर को थकाना अत्यन्त ही आवश्यक है ।
ब्रह्मचर्य-संयम में सहायक आसन एवं प्राणायाम –
आसन – १. ब्रह्मचर्यासन, २. सिद्धासन, ३. बज्रासन, ४. पद्मासन, ५. पादपश्चिमोत्तानासन, ६. शीर्षासन, ७. जानुशिरासन, ८. पादांगुष्ठासन, ९. द्विपाद चक्रासन, १०. नाभ्यासन, ११. उत्थितएकैक-पादासन, १२. सम्प्रसारण भू नमनासन ।
(क्रमशः आसनों के चित्र)
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