भारतकोश
ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana

प्रेमवल्लभा शरण द्वारा

स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)

DevanagariHindipublished74 पृष्ठ

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प्राणायाम – अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका आदि ।

व्यायाम-प्राणायाम के तुरंत बाद लघुशंका अवश्य जाएँ और कम से कम ३० मिनिट तक कुछ खाएँ-पिएँ नहीं ।

औषधि सेवन – आंवला, त्रिफला चूर्ण एवं प्रातःकाल स्नानोपरान्त १ तुलसी की पत्ती पाएँ तथा शाम के समय १ नीम की पत्ती पाएँ, अगर वह पचने लगे तो धीरे-धीरे पाचन के अनुसार उनकी मात्रा में १० पत्तियों तक वृद्धि कर सकते हैं, ये बहुत लाभकारक औषधी है अथवा वीर्य पुष्टता के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सकों के परामर्श से कुछ दिनों के लिए औषधी ले लें और सेवन-विधि के अनुसार उसका सेवन करें ।

विशेष –

  • (१) सूर्य नमस्कार एवं मूलबंध लगाना ब्रह्मचर्य में बहुत सहायक है ।
  • (२) यदि संभव हो सके तो लँगोट (कौपीन) एवं खड़ाऊँ धारण करें ।
  • (३) ब्रह्मचर्य पालन करने वाले साधक को कभी दिन में सोना नहीं चाहिए यदि रात्रि में नींद पूरी नहीं हुई हो तो १ घंटे विश्राम कर लें अन्यथा नहीं; एवं रात्रि में भी लघुशंका से निवृत्त होकर हाथ-पैर धुलकर, यदि सम्भव हो तो बायीं करवट सोना चाहिए ।

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