भारतकोश
ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

ब्रह्मचर्य - स्वस्थ व सुखमय साधना

Brahmacharya - Swasth Va Sukhmay Sadhana

प्रेमवल्लभा शरण द्वारा

स्रोत: 2019 Shri Hit Radha Keli Kunj Trust edition · श्री हित राधा केलि कुञ्ज ट्रस्ट, वृन्दावन · 2019 (उद्गम)

DevanagariHindipublished74 पृष्ठ

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बदलना बहुत जरूरी है और उसके बदलने के लिए नित्य सत्संग, शास्त्र स्वाध्याय और नामजप तीनों अति आवश्यक हैं । इससे चिंतन बदलेगा और व्यायाम-प्राणायाम आदि से शरीर की नस-नाड़ियाँ मजबूत होंगी । शुद्ध आहार से मन चलायमान नहीं होगा । आप तीनों को करें, आहार ठीक कीजिये, भजन-साधन से चिंतन ठीक कीजिये और हृद निश्चय के द्वारा उन अशुभ क्रियाओं को दूर कीजिये, जो अशुभ क्रियाएँ आप कर रहे हैं तो आप सुधर जायेंगे नहीं तो कुछ दिनों बाद ऐसा होने लगेगा कि आपकी विचार शक्ति लुप्त हो जायेगी । आपके अन्दर बिना किसी कारण के भय और घबराहट बनी रहेगी यानी सैकड़ों तरह की परेशानियाँ आ जायेंगी ।

जब तक चिंतन अपवित्र है तब तक ब्रह्मचर्य धारण करना बड़ा कठिन है । ब्रह्मचर्य संयम के लिए आवश्यक मुख्य बात है कि हमारा चिंतन बदले ।

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