ब्रह्मचर्य विज्ञान
Brahmacharya Vigyaan
पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा
स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)
पृष्ठ 121, कुल 380 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्रह्मचर्य-विक्रान्त
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लिका नाम की तीन कन्यायें जीत कर ले लगे। अम्बिका और अम्बालिका का विवाह तो अपने दोनों छोटे भाई चित्राङ्गद और विधिचित्रकी के साथ कर दिया, पर ब्रह्मचारी रहने के कारण अम्बा को लौटने की आज्ञा दी। इस पर अम्बा को दुःख हुआ। उसने महायोगदा परशुराम के पास जाकर अपना कष्ट निवेदन किया। उन्होंने कहा कि हम तुम्हारे लिये भीष्म से युद्ध करेंगे। यदि वे हम से परास्त हो गये, तो तुम्हारा विवाह उनसे करा दिया जायगा। वे अम्बा को लेकर भीष्म के यहाँ आये और समन्था का कि तुम इसके साथ विवाह करलो। पर उन्होंने अस्वीकार किया। भीष्म ने यह बात कही कि यदि आप से युद्ध में हार गया तो विवाह कर लेंगा। दोनों में घोर युद्ध ठन गया। भीष्म के हृदय में ब्रह्मचर्य के कारण अटूट साहस था। उन्होंने अस्वीका स्मरण किया और उन्हें विश्वास हो गया कि मेरा पक्ष न्याय का है और मैं पराजित नहीं हो सकूँगा। अन्त में परशुराम जी हार कर चले गये।
अब इन दो कथाओं से उत्साह और साहस का परिचय पा गये होंगे। ब्रह्मचर्य के पालन करने वालों को ही ये दो दिव्य शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। यदि उत्साह-साहस से अपने को मूर्खित करना है—तो अपने वीर्य की भली भाँति रक्षा करनी चाहिये।
१०—ब्रह्मचर्य से स्वास्थ-रक्षा
“शरीरमार्चं खंजु धर्म-साधनम्”
(वैशक)
हमारा शरीर ही सब धर्मों का प्रधान साधन है।