भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य से ब्रह्मज्ञान

अब ऊपर की बात से पाठक जान गये होंगे कि ब्रह्मचर्य कैसी वस्तु है ? इसके पालन से कठिन से कठिन रोगों का संहार किया जा सकता है ।

१३—ब्रह्मचर्य से ब्रह्मज्ञान

“ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिं मत्तिरेष्वाधि गच्छति ।”

( योगेश्वर हृण्ण )

ब्रह्मज्ञान के प्राप्त हो जाने पर मनुष्य बहुत शीघ्र ही परमानन्द का अधिकारी होता है ।

“ऋते ज्ञानाच्च मुक्तिः ।”

( शंकराचार्य )

ब्रह्मज्ञान के बिना किसी की मुक्ति नहीं हो सकती ।

हमारे ऋषियों ने ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के लिये अनेक मार्ग निश्चित किये हैं । उन पर चल कर शीघ्र ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त किया जा सकता है । ब्रह्मज्ञान के प्राप्त हो जाने पर सब कुछ सुलभ हो जाता है । इस ज्ञान के लिये ही चार आश्रमों का विधान किया गया है ।

ज्ञानयोग्योपनिषद् में इन्द्र-विरोचन-संवाद है । उसमें ब्रह्मचर्य से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति का समर्थन किया गया है । विलासह ब्रह्मा ने उन दोनों को ३२ वर्ष तक अखण्ड ब्रह्मचर्य पालन करने की शिखा दी है ।

“ब्रह्मचर्येण हो वेष्टात्मान मनुविन्दते ।”